बुधवार को लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 पर ऐतिहासिक बहस और मतदान होने वाला है। इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच जबरदस्त टकराव देखने को मिल रहा है। विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ इसे “असंवैधानिक” और “मुस्लिम समुदाय के हितों के खिलाफ” बताकर विरोध कर रहा है, जबकि एनडीए गठबंधन ने विधेयक पारित कराने के लिए अपनी रणनीति तैयार कर ली है। इस बीच, इस लेख में हम वक्फ से जुड़े 8 महत्वपूर्ण सवालों के जवाब देंगे, ताकि आप इस मुद्दे को बेहतर तरीके से समझ सकें।
1. भारत में (Waqf) वक्फ क्या है?
वक्फ एक इस्लामिक प्रथा है जिसमें कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति धार्मिक, सामाजिक या दान कार्यों के लिए समर्पित कर देता है। यह संपत्ति हमेशा के लिए वक्फ हो जाती है और इसे बेचा या बदला नहीं जा सकता। इसकी देखरेख के लिए एक ‘मुतवल्ली’ नियुक्त किया जाता है।
2. भारत में (Waqf) वक्फ का इतिहास और इसे कौन से कानून संचालित करते हैं?
भारत में वक्फ की शुरुआत दिल्ली सल्तनत के समय से हुई थी। अंग्रेजी शासन के दौरान वक्फ संपत्तियों को लेकर कई विवाद हुए। 1913 में वक्फ वैलिडेटिंग एक्ट लाया गया, जिसने वक्फ को कानूनी मान्यता दी। आजादी के बाद 1954 में वक्फ अधिनियम लागू किया गया और फिर 1995 में इसमें बड़े सुधार किए गए। 2013 में कुछ और संशोधन हुए और अब 2024 में नया संशोधन विधेयक लाया गया है।
3. 2024 के वक्फ (संशोधन) विधेयक में क्या बदलाव किए गए हैं?
नए विधेयक में निम्नलिखित प्रमुख बदलाव प्रस्तावित हैं:
- वक्फ संपत्तियों की पहचान और सर्वेक्षण के लिए कलेक्टर को अधिकृत किया जाएगा।
- वक्फ बोर्ड और सेंट्रल वक्फ काउंसिल में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किया जाएगा।
- ‘वक्फ बाय यूजर’ को समाप्त किया जाएगा, जिससे संपत्ति को वक्फ घोषित करने की प्रक्रिया बदलेगी।
- वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसलों के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की जा सकेगी।
- वक्फ संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ेगा और विवादों को जल्द सुलझाने की प्रक्रिया आसान होगी।
4. भारत में वक्फ संपत्तियों से जुड़े प्रमुख विवाद क्या हैं?
भारत में वक्फ संपत्तियों को लेकर कई विवाद हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
- वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जे और कानूनी विवाद।
- वक्फ बोर्ड द्वारा संपत्तियों के दुरुपयोग के आरोप।
- रजिस्ट्रेशन और सर्वे की पारदर्शिता को लेकर सवाल।
- ट्रिब्यूनल के फैसलों पर कोर्ट की निगरानी न होने की समस्या।
5. वक्फ बोर्ड और सेंट्रल वक्फ काउंसिल में क्या बदलाव होंगे?
नए विधेयक के अनुसार:
- वक्फ बोर्ड में अब गैर-मुस्लिम सदस्य भी होंगे।
- वक्फ बोर्ड के सदस्यों का चयन राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।
- सेंट्रल वक्फ काउंसिल में भी गैर-मुस्लिमों को स्थान मिलेगा।
- वक्फ बोर्ड के सीईओ के लिए मुस्लिम होने की अनिवार्यता समाप्त होगी।
6. नए विधेयक का वक्फ संपत्तियों के सर्वे और मालिकाना हक पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
नए विधेयक में सर्वेक्षण का अधिकार कलेक्टर को दिया गया है। अगर कोई सरकारी संपत्ति वक्फ के रूप में पंजीकृत थी, तो अब यह वक्फ नहीं मानी जाएगी। इससे सरकारी संपत्तियों को बचाने और वक्फ संपत्तियों का सही प्रबंधन करने में मदद मिलेगी।
7. वक्फ ट्रिब्यूनल और कानूनी विवादों के निपटारे में क्या बदलाव होंगे?
- अब ट्रिब्यूनल के फैसलों के खिलाफ हाई कोर्ट में 90 दिनों के भीतर अपील की जा सकेगी।
- ट्रिब्यूनल में मुस्लिम कानून विशेषज्ञ होने की अनिवार्यता समाप्त होगी।
- ट्रिब्यूनल में एक जिला कोर्ट के जज और जॉइंट सेक्रेटरी रैंक के अधिकारी को शामिल किया जाएगा।
8. नए विधेयक की प्रमुख आलोचनाएँ क्या हैं?
- मुस्लिम समुदाय का कहना है कि इससे उनके धार्मिक मामलों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ेगा।
- वक्फ बोर्ड और सेंट्रल वक्फ काउंसिल में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने का विरोध किया जा रहा है।
- ‘वक्फ बाय यूजर’ हटाने से कई संपत्तियों की कानूनी स्थिति प्रभावित होगी।
- वक्फ बनाने के लिए 5 साल से मुस्लिम होने की शर्त को भेदभावपूर्ण बताया जा रहा है।
निष्कर्ष
वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 भारत में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने का प्रयास कर रहा है। हालांकि, विपक्ष और मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्गों द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि यह विधेयक संसद में पारित होकर कानून बनता है या नहीं।
अगर आपको यह जानकारी उपयोगी लगी हो, तो इसे अधिक से अधिक साझा करें और अपने विचार कमेंट में लिखें।